May 3, 2015

मई के पहले दिन कौनसे शुभ संयोग संवारेंगे आपके काम

1 मई 2015 को शुक्रवार है। शुभ वि.सं.- 2072, संवत्सर नाम- कीलक, अयन- उत्तर, शाके- 1937, हिजरी- 1436, मु. मास- रज्जब-11, ऋतु- ग्रीष्म, मास- वैशाख, पक्ष- शुक्ल है।
शुभ तिथि
त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि सम्पूर्ण दिवारात्रि रहेगी। त्रयोदशी तिथि में जनेऊ को छोड़कर समस्त शुभ व मंगल कार्य यथा- विवाह, वास्तु-गृहारम्भ, गृहप्रवेश, यात्रा, प्रतिष्ठा, युद्ध, वस्त्रालंकार धारण तथा अन्य उत्सवादि शुभ कहे गए हैं।
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त्रयोदशी तिथि में जन्मा जातक सामान्यतः धनवान, विद्यावान, पराक्रमी, परोपकारी, बुद्धिमान, योग्य, राज-समाज में मान-सम्मान पाने वाले तथा शास्त्रविज्ञ होता है।
नक्षत्र
हस्त नक्षत्र सम्पूर्ण दिवारात्रि रहेगा। हस्त नक्षत्र में यात्रा, विद्या, विवाहादि मांगलिक कार्य, अलंकार, वस्त्र, औषध, गृहारम्भ, प्रवेश, प्रतिष्ठा तथा अन्य मांगलिक कार्यादि शुभ होते हैं। हस्त नक्षत्र में जन्मा जातक सामान्यतः मेधावी, उत्साही, परोपकारी, शूरवीर, भाग्यशाली, सम्मानित, सुखी और अपने समाज को नेतृत्व देने वाला होता है।
कोई जातक क्रोधी, निर्दयी, अशुभकर्मी, कलहप्रद वातावरण रखने वाला भी होता है। ये दुर्गुण किसी-किसी जातक में किसी पाप योग के प्रभाव से उत्पन्न हो जाते हैं। इनका भाग्योदय लगभग 30-32 वर्ष की आयु तक होता है।
योग
हर्षण नामक नैसर्गिक शुभ योग रात्रि 11.13 तक, तदन्तर वज्र नामक नैसर्गिक अशुभ योग रहेगा। वज्र नामक योग की प्रथम तीन घटी शुभ कार्यों में त्याज्य हैं।
करण
कौलव नामकरण सायं 5.13 तक, तदन्तर तैतिलादि करण रहेंगे।
चंद्रमा
चंद्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि कन्या राशि में रहेगा।
व्रतोत्सव
कल प्रदोष व्रत और विश्व मजदूर दिवस है।
शुभ कार्यों के मुहूर्त
उक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार शुक्रवार को विवाह (केतुवेध व ग्रहणम् दोषयुक्त अति आवश्यकता में), गृहारम्भ अशुद्ध (केतुवेध), गृहप्रवेश, वधु-प्रवेश, द्विरागमन, प्रसूतिस्नान, विद्यारम्भ, कर्णवेध, नामकरण, अन्नप्राशन, कूपारम्भ, चूड़ाकरण, हलप्रवहण व विपणि-व्यापारारम्भ आदि के हस्त नक्षत्र में शुभ मुहूर्त हैं।
वारकृत्य कार्य
शुक्रवार को सामान्यतः नृत्य-वाद्य-गीत-कलारम्भ, सांसर्गिक कार्य, धन व भूमि सम्बंधी कार्य, नवीन वस्त्राभूषण धारण, मनोरंजन के कार्य और कृषि सम्बंधी समस्त कार्य शुभ रहते हैं।
दिशाशूल
शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चंद्र स्थिति के अनुसार दक्षिण दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद रहेगी।
Source - rajasthanpatrika

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